इन चित्रों को कला की श्रेणी में रखा जा सकता है?




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सभी चित्र गूगल छवियों से लिए गए हैं। इन चित्रों के संग्रह करने वाले का तथा जिस साईट पर इनका प्रदर्शन था उनका आभार है।
ज़िन्दगी तस्वीर दिखाती है,
हमसफ़र अपना बनाती है,
कौन जाने कब रुक जाए राह,
इस सोच से मंजिल के करीब लाती है।
आज लगभग तीन माह बाद आपके सामने हूँ। कभी सोचती थी किशायद ऐसा मौका ही नहीं आएगा जब मैं अपने किसी भी काम से बहुत दिनों तक दूर रहूंगी। इधर वक्त ने आइना दिखाया और पिछले दो माह एक तरीके से पलंग पर गुजरे।
इस दौरान अध्ययन किया, कुछ नईबातें सीखी। आब आए हैं तो मिलना जुलना होगा ही।