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26.2.09

चले गए वो छोड़ कर

आए वो कुछ पल को और नहीं मिला कुछ तो चल दिए। बात है हमारे फोलोवार्स की जो पहली ही पोस्ट पर धकधकाते आ गए थे। क्या हुआ किअब चले गए? चलो ये तो सफर है एक आता है तो एक जाता है पर सत्यता ये है कि किसी महिला के साथ इस तरह ............

ये किसी और के लिए नहीं उनके लिए जो किसी भी महिला को इस रूप में देखते हैं तो तुंरत खींचे चले आते हैं और कुछ भी न मिल पाने पर बापस लौट जाते हैं। हम दे भी क्या सकते थे सिवाय कुछ टिप्पणी के। अब जब चले ही गए हो तो इतना कहेंगे "ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना।"

पल भर का साथ और कई पलों की जुदाई ये तो जिंदगी का सत्य है। पर जो इसके अलावा इस सत्य पर जा रहा हो कि मैंने उसके ब्लॉग पर आकर कुछ नहीं लिखा तो शायद मैं अभी सीख नहीं पाई ब्लॉग के नियम क़ानून। धीरे धीरे प्रयास है समझने का और फ़िर बताने का कि किसने क्या लिखा और किस तरह का लिखा। अभी तो ये शुरुआत है, आगे-आगे देखिये होता है क्या?