अपना ब्लाग तो बहुत दिन पहले बना लिया था किन्तु क्या लिखें और कब लिखें ये समझ से बाहर था। अब लगा कि आज का दिन सबसे अच्छा है अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का, सबके सामने रखने का...... बस इसी आकांक्षा के साथ ओस की बूँद सज पड़ी है आपके सामने, देखना है कि क्या टिकेगी पल भर से अधिक.........
मैं अनुभूति की चाह,
अनन्त आकाश की राह
खोजती हूँ।
सोचती हूँ
कभी आयेगा वो पल
जबकि मिलेगा
सुकून दो पल।
आज सज जाती हूँ
बनके शबनम और
फिर बिखर जाती हूँ
आने पर उसका उजास।
चलेगा कब तलक यूँ
सजना और बिखरना?
पल भर को सजना
और फिर
पल भर में बिखरना,
एक ओस की बूँद की तरह।